प्रिय! मैं हूँ एक पहेली भी

प्रिय! मैं हूँ एक पहेली भी

Mahadevi Varma


प्रिय! मैं हूँ एक पहेली भी !

जितना मधु जितना मधुर हास
जितना मद तेरी चितवन में
जितना क्रन्दन जितना विषाद
जितना विष जग के स्पन्दन में
पी पी मैं चिर दुख-प्यास बनी
सुख-सरिता की रंगरेली भी !

मेरे प्रतिरोमों से अविरत,
झरते हैं निर्झर और आग;
करती विरक्ति आसक्ति प्यार,
मेरे श्वासों में जाग जाग;
प्रिय मैं सीमा की गोदपली
पर हूँ असीम से खेली भी !

I, Too, Am a Riddle

Anjali Gupta


My love, I, too, am a riddle.

The nectar, the honeyed laughter, 
The lust in your glances, 
The lamentation, the despair, 
All the poison in this quivering world.  

I drink, I drink it all, and yet I thirst for sorrow 
And bathe in the river of joy. 

From every fiber of my being 
Both the fire and water fall. 
Renunciation and devotion join 
In my panting breath. 

My love, I was born to the lap of limitation,
But I, too, have loved in the limitless.